सपना भट्ट

बेटी की माँ होना

मन की धुंधलाई स्मृति में
खेत से लौटी क्लान्त माँ का बेडौल पेट उभरता है ।

किसी उदास कातिक मेंद
मैं अपने जन्म का उत्सव
रुदन में बदलते देखती हूँ।

बुढ दादी की कांपती हुई आवाज़ आती है
ये रां ! फीर बिटुल ह्वे ग्याई ।

निष्प्राण माँ की आंखों में ममत्व नहीं
शोक पसर जाता है।

पोते की प्रतीक्षा में पगलाई दादी बड़बड़ाती है
तेरा नसीब फिर से फूट गया र....

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