कविता

  • लता मंगेशकर का गांव

    कोंकण के सब गांवों जैसा है गांव मंगेशी सदियों पुराना भव्य मंदिर है यहां भगवान मंगेश का जिसके चरण पखारने को है

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  • बाबू-बिटवा

    बिटवा रूठा हुआ है बाबू से धुँआया हुआ है मन बाबू का भी खीज से

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  • अनुभूति

    इतराती थी उपवन में वो लता थी शोभा उपवन की वो लता सुकून था जीवन में,  सहलाती थी पवन दुलारती थी वृष्टि, पोषित करता था चम

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  • बेटी की माँ होना

    मन की धुंधलाई स्मृति में खेत से लौटी क्लान्त माँ का बेडौल पेट उभरता है ।

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