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आज से फागुन की शुरुआत हो चुकी थी, हफ्ते भर पहले माघ की ठंड सबको दहला रही थी, मगर अब कुछ राहत थी। उत्तराखंड से आकर उन्होंने प्रयागराज में महीने भर समय बिताया था। माघ महीने में कल्पवास उनके लिए देह को साधने या फिर यूं कहें नकारने की एक शर्त की तरह लगता रहा। हाड़ कंपाने वाली ठंड में अध्यात्म साधना जरूरत थी या जिद कौन जाने। फिर अब निकल पड़े थे रामनगर के लिए। बीस बरस का इ....
