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फ्लेग मार्च घोड़े करें, कफ्रर्यू आधी रात
रोज भटकता रात दिन, मुझमें यह गुजरात
मुझेमें चीखें जागती, शिविर जागते रात
उठ-उठ बैठे नींद से, डर-डर कर गुजरात
पुलिस, सायरन, सीटियां, भीड़ मुनादी, जेल
यह देखे गुजरात ने, इक माचिस के खेल
कभी चीखता गोधरा, कभी भिव....
