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तुम कैद में नहीं हो वरवर राव
क्योंकि पढ़ी जा रही हैं तुम्हारी कविताएं
लगाये जा रहे हैं तुम्हारे नारे
आज़ाद हैं तुम्हारे विचार
तुम्हारी कलम के सामने
नतमस्तक हो गयीं बंदूकें
आज तुम्हारी कैद में हैं
तुम कैद में नहीं हो वरवर राव
क्योंकि जनता के कवि को कैद करके
कविता को बंदी बनाने वाले
सत्ता के बिखरे मंसूबे
आज तु....
