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मेरे निठल्लेपन में देश के प्रथम प्रधानमंत्री और दूरदर्शी आदमी पंडित जवाहर लाल नेहरू का नारा ‘आराम हराम है’ खलल डालता है। मुझे हमेशा आराम से पड़ा देख मेरा भला चाहने वाले कहते हैं- कुछ करो। यूँ बैठकर जीवन व्यर्थ न करो। आराम हराम है। मैं कुछ करना नहीं चाहता। तो जो मुझे कुछ करने की सलाह देता है, मुझे उससे ईर्ष्या होती है।
ईर्ष्या ने ही मुझे अपने निठल्लेपन के बचाव की नई-नई तर....
