प्रेम भारद्वाज के बारे में संस्मरण लिखना होगा, यह मेरी कल्पना के परे है। मासिक पत्रिका पाखी के कारण उनसे परिचय हुआ। मुझे याद है कि दरियागंज के प्रज्ञा संस्थान में वे आए। इमरजेंसी पर वे लंबी बातचीत के लिए आए थे, जो कई दिनों तक हम करते रहे। उसके बाद उनसे यदा-कदा गोश्ठियों में भेंट हो जाया करती थी। फिर मिलने-जुलने का सिलसिला चल पड़ा। वे प्रवासी भवन और नोएडा के हिन्दुस्थान समा....
