बद्री सिंह भाटिया

बकलम खुद

मेरी रचना यात्रा के पड़ाव
अपनी लेखकीय यात्रा के इस पड़ाव पर मैं कुछ पीछे देखता हूं। लेखक होने से पहले अपने अनुभव को तापता-सा। काफी पीछे और हैरान हूं कि किस तरह इतने पड़ाव पार करता मैं यहां आ पहुंचा हूं। स्वतंत्रता प्राप्ति के एक मास ग्यारह दिन पहलेे (04-07-1947 तदानुसार 20 आषाढ़, 2004) बरसात आरंभ हो चुकी थी। मक्की के खेत में गोड़ाई का काम चल रहा था। तब हिम....

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