सूर्यबाला
शिवा : मेरे संधिपत्र
सन् 1976, पत्रिका थी ‘धर्मयुग’ जिसने एक युवा लेखिका को मौका दिया। मात्र दो-ढाई वर्ष का लेखन अनुभव रखने वाली इस लेखिका का उपन्यास ‘मेरी संधिपत्र’, ‘धर्मयुग’ में धारावाहिक प्रकाशित होना क्या शुरू हुआ, सूर्यबाला का नाम मानो हिन्दुस्तान के घर-घर में पहुंच गया। ‘पाखी’ हिंदी साहित्य की कालजयी रचनाओं का परिचय युवा पाठक वर्ग से कराने क....
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