आनंद का बाजारीकरण और प्रकृति से हमारा विच्छेद
आज का मनुष्य सुख की तलाश में है, परंतु उसने सुख और आनंद के बीच के अंतर को लगभग भुला दिया है। सुख वह है जिसे हम बाहरी वस्तुओं, सुविधाओं और उपलब्धियों से जोड़ते हैं, जबकि आनंद एक आंतरिक अनुभूति है, जो किसी वस्तु, व्यक्ति या परिस्थिति पर निर्भर नहीं होती। यही कारण है कि आनंद को न तो खरीदा जा सकता है, न बेचा जा सकता है, और न ....
