मनीषा पांडेय

मनीषा पांडेय की कविता

घर जैसे घर

जिनके घर नहीं होते---
घर होते हैं,
पर, घर जैसे घर नहीं होते।

वो जाते होंगे कहां?
काम-काज पूरे करके,
ऑफिसों से लौट के,
रास्ते से सब्जी खरीद के,
ऑटो, रिक्शा, टैक्सी से
कहां का पता देते होंगे?

दिन भर के कई युद्ध लड़ के,
कोई जंग हार के,
या जीत के जहां
वो जाते होंगे कहां?

प्रेम....

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