मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि तीस माले वाली इस इमारत के टॉप फ्रलोर पर एक दिन बिना लिफ्रट के चढ़ना पड़ेगा। फटफट-फटफट चार-पांच मंजिल चढ़ते-चढ़ते मैं हांफने लगा था। छाती लुहार की धौंकनी की तरह बजने लगी थी। एक दिन पहले जबर्दस्त आंधी के बाद आई बेमौसम बारिश ने मौसम को बेपनाह बदल दिया था। तापमान औंधे मुंह गिर पड़ा था। आक्रामक होती ग्रीष्म-ट्टतु अचानक धराशायी हो गई थ....
