ललन चतुर्वेदी

ललन चतुर्वेदी की कविताएं

यात्रीगण! कृपया ध्यान दें

बिल्कुल भूल गया था
कि एक दिन लौटना भी है
अचानक याद आया तो गिरते-गिरते संभला
सामान बहुत है
कोई कुली दिख नहीं रहा
यह कैसी अव्यवस्था है
जिसमें बुकिंग क्लर्क ने टिकट तो दी
लेकिन दर्ज करना भूल गया डिपार्चर का
डेट और टाइम
नहीं, ऐसी भयंकर भूल तो नहीं कर सकता 
कोई पेशेवर मुलाजिम
श....

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