सुबह में जब से नींद खुली है, सिर भारी-भारी लग रहा। अनुज भइया तैयार होकर निकल रहे हैं। बिन्नी और अरुण के हाथ में चाय की प्याली है। मामी की आवाज आई हैµ‘अरे बिन्नी, विजय को उठाओ।’ मैं आंगन में कुएं की ओर निकला तो आसमानी साड़ी में एक गोरा चेहरा दिखा। मुझे आता देखकर वह लड़की धुले बरतन समेटकर ओट में खिसक गई। पता नहीं कौन है! इतनी सुबह पड़ोस की कोई लड़की यहां क्यों आएगी! म....
