‘तीन पीढ़ियां: साठ कविताएं’ पुस्तक पढ़नी शुरू की तो पढ़ता चला गया। यह वंशानुगत नहीं, परिवारगत सृजनात्मकता का खूबसूरत घर है, जिसमें एक बार प्रवेश करने के बाद खाली हाथ लौटा नहीं जा सकता। इसकी तीन पीढ़ियों की सुघड़ रचनाशीलता से
कोई-न-कोई कविता, कोई-न-कोई ग़ज़ल और कोई न कोई गीत-पंक्ति लेकर हम सहर्ष वापस आ सकते हैं।
इस संकलन में शैलेंद्र शैल के पिता खुशीराम वाशिष....
