शैलेंद्र चौहान

नफरत के दौर में एक जरूरी सांस्कृतिक हस्तक्षेप

उर्दू साहित्य में कृश्न चन्दर का नाम केवल एक कथाकार के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे लेखक के रूप में लिया जाता है जिसने साहित्य को मनुष्य की मुक्ति और सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया। उनका नाटक ‘दरवाजे खोल दो’ इसी मानवीय और प्रगतिशील दृष्टि का सशक्त उदाहरण है। यह नाटक केवल रंगमंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि 
भारतीय समाज के भीतर मौजूद सांप्रदायिकता, घृणा, विभाजन औ....

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