मुकेश नौटियाल

सियारसिंगी

पहाड़ की ढलुवा पीठ पर चिपका है मेरा गांव। नीचे तलहटी में चारधाम यात्र मार्ग का एक पड़ाव, छोटा-सा कस्बाई बाजार सियारसौड़ है। सियार आप जानते ही हैं और सौड़ का मतलब होता है मैदान। सियारों का मैदान। गांव और सियारसौड़ के बीच सीढ़ीदार खेतों का लंबा-चौड़ा खूबसूरत विस्तार है। बाजार और गांव के बीच एक पथरीला उभार है। टीले जैसा। इसी पर बसा है हमारा स्कूल। यहां से ऊपर देखो तो गां....

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