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हमेशा की तरह शानदार अंक
कवर पेज हमेशा की तरह बहुत ही शानदार है।
आबिद सुरती का हारुन रशीद खान के साथ साक्षात्कार रोचक है। सुकन्या शर्मा की कहानी ‘आखिरी साथी’ वृद्धावस्था में अकेले पड़ते जा रहे लोगों की वेदना को प्रभावी ढंग प्रस्तुत करती है। हरजेंद्र चौधरी की कहानी ‘जैसे कुछ हुआ ही नहीं’ एक ट्यूशन सेंटर में हुई घटना के....
