मुकेश कुमार

नेशन फर्स्ट

अन्विता जानती थी कि अल्गोरिदम के इस सारहीन कोहरे को केवल शुद्ध सत्य से नहीं तोड़ा जा सकता। उन्हें अल्गोरिदम की भाषा सीखनी होगी।
अन्विता ने कबीर से कहा, ‘हमारा दुश्मन बदल गया है। पहले हमें झूठ से लड़ना था, अब हमें उदासीनता से लड़ना है। और उदासीनता का कोई इलाज नहीं है, सिवाय आकर्षण के।’
अन्विता को याद आया, वीरेंद्र माथुर ने उन्हें ‘वैश्विक ट्र−थ ब्रांड ब....

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