जिंदगी को उसके ठोस और निश्चित मकाम तक पहुंचाने वाले रास्ते कभी दुर्गम होते हैं तो कभी दुरूह। कभी अनजाने होते हैं और कभी भटका देने वाले। इन भटकनों और भुलावों से दूर करने में अक्सर वे नक्शे हमारे मददगार होते हैं जिन्हें हमसे पहले उन दुर्गम राहों पर चलने वालों ने भविष्य में उन्हीं रास्तों से गुजरने वाले अनेक राहगीरों के लिए ईजाद किया। कभी बीहड़ के बीच एक पगडंडी निकाल ली तो ....
