प्रज्ञा गुप्ता का कविता-संसार जितना भावनात्मक संवेदना का प्रदेश है, उतना ही वह चिंतन, इतिहास, स्मृति और सांस्कृतिक चेतना का प्रांगण भी है। उनकी कविताएं किसी अकेले स्त्री-मन की धड़कनें भर नहीं, बल्कि सामूहिक स्त्री-अनुभवों की बहुरंगी प्रतिध्वनियां हैंµअक्सर धीमी, कभी अनसुनी, तो कभी प्रतिरोध के स्वर में थरथराती हुईं। प्रज्ञा निजी जीवन के छोटे-छोटे स्पर्शोंµबेटी के ....
