प्रेम शशांक

किसी वाद से बंधा नहीं हूं; कवि हूं, अंधा नहीं हूं 

सुपरिचित कवि राहुल राजेश का नया कविता संग्रह ‘झूठ के विरुद्ध’ (2025) सामने है। प्रस्तुत आलेख के शीर्षक में उनके दूसरे संग्रह ‘मुस्कान क्षण भर’ (2021) की पहली कविता की पंक्तियां ली गई हैं। इस कविता में न केवल दृढ़ता से वह अपने कवि होने को स्वीकार करते हैं, बल्कि वह किस तरह के कवि हैं और किस तरह के नहीं हैं, इसकी भी स्पष्ट घोषणा करते हैं। 
उन्होंने अपने नए संग्रह की भूमिका....

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