जरूरी नहीं...
जरूरी नहीं कि जो दबा है अभी
अन्याय के बेरहम बूटों तले
वह शामिल ही होगा
वक्त के मिजाज को बदलने की मुहिम में
जरूरी नहीं कि जो चल रहा नंगे पांव
झेल रहा नंगे बदन मौसम की मार
वक्त बदलने पर
आकाश तले सो रहे लोगों पर
कोड़े बरसाए जाने की वकालत न करे
अंधेरी सुरंगों में आज घुट रहा जिसका दम
थो....
