नीरजा हेमेंद्र

विस्तृत है आसमान तुम्हारा

आज निधि की दसवीं की परीक्षा का परिणाम घोषित होने वाला था। वह सुबह से ही गंभीर और कुछ घबराई हुई-सी लग रही थी। 
‘मम्मी, मैंने पूरे वर्ष परिश्रम से पढ़ाई की है। प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण तो हो जाऊंगी न?’ निधि ने पुनः वही प्रश्न पूछा। 
‘ओ मेरी प्यारी बेटी! आज सुबह से तुम कई बार ये प्रश्न पूछ चुकी हो। इसके बारे में मुझे यही कहना है कि अब तुम निश्चिंत हो जाओ। तुमने परिश....

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