दोपहर का समय होने से नींद आना स्वाभाविक था, फिर अभी आधा घंटा पहले ही तो उसने जमकर खाना खाया था। सामने वाले मकानों की कतार से भी औरतें सफेद साड़ियों को सिर तक ढांपे हुए, सड़क पार करते हुए इस ओर आने लगी थीं। वह ‘वैन’ के अगले हिस्से से बाहर आ गया था। उसने फिर से बीड़ी सुलगाने के लिए जेब से माचिस को टटोलते हुए निकाला। भड़ाक से माचिस की तीली जल उठी थी। बीड़ी का पहला सुट्टा जोर से खीं....
