पाठक

पूर्वाग्रहों से लैस हैं कल्पित

'पाखी’ (जनवरी अंक) में कृष्ण कल्पित के कॉलम ने मुझे विचलित किया। वे लिखते हैं... ‘यह निर्मल वर्मा का सौभाग्य था कि उन्हें गुरदयाल सिंह के साथ और सान्निध्य में ज्ञानपीठ प्राप्त हुआ। वे यह भी लिखते हैं कि---‘निर्मल वर्मा भक्तों ने उस वक्त बहुत नफरत फैलाई थी। उन्होंने ज्ञानपीठ वालों से दोनों को पूरी राशि देने जैसी अश्लील मांग कर डाली थी। मांग के साथ ‘अश्लील’ जैसे शब्....

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