‘पहल’ और ज्ञानरंजन
[दिसंबर में हिंदी के विख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे और जनवरी की शुरुआत में हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार और संपादक ज्ञानरंजन का निधन हो गया। जब 2009 में ‘पहल’ के 90 अंक निकालने के बाद ज्ञानरंजन ने इसे बंद करने की घोषणा की थी तो हिंदी-संसार हतप्रभ रह गया था। उस समय ‘पहल’ के अवसान पर बहुत लिखा गया था, यह टिप्पणी उसी स....
