हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहां मनुष्य का समूचा अनुभव-संसार स्क्रीन पर सिमटता जा रहा है। स्पर्श, अनुभूति, ठहराव, ये सब तेजी से बदल रहे हैं। डिजिटल कंटेंट की बेहिसाब भीड़ ने हमारे मानस पर ऐसी गति थोप दी है जिसने न केवल हमें, बल्कि हमारे साहित्य को भी नई आकृतियां दे दी हैं। साहित्य के इतिहास में परिवर्तन हमेशा हुआ है, पर इतना व्यापक, इतना बहुआयामी और इतना अस्थिर परिवर्तन शायद प....
