वो जून 2023 के दिन थे। कोरोना महामारी से हांफती हुई दुनिया ने राहत की सांस लेना शुरू कर दिया था। मुझे साहित्य अकादमी ने राजस्थानी भाषा के उस वर्ष के युवा पुरस्कार के निर्णायक होने की जिम्मेदारी सौंपी थी (याने निर्णायक मंडल के तीन सदस्यों में एक मैं भी था) और अंतिम घोषणा के पहले निर्णायक मंडल की एक बैठक दिल्ली में होनी थी। स्वाभाविक तौर से मुझसे भी अपेक्षा थी कि मैं उस ब....
