शब्द मुखबिर हैं तुम्हारे
झूठ जितने कपट सारे
छिपे मंसूबे तुम्हारे
लाख पहनाओं इन्हें
पर मिलेंगे कपड़े उतारे
यही पकड़ाएंगे बंदे!
शब्द मुखबिर है हमारे
बोल करके निकल जाओगे
न इस गफलत में रहना
बांध सकते नहीं इनको
छंद और तुकांत पहना
जहां से निकले वहीं के
लिखे होंगे पते सारे
किस ....
