मुझे इस सलीब से उतार लीजिए

क्या आपने किसी प्रिय के मृत्यु की कामना की है? मैंने कम से कम एक मामले में बड़ी शिद्दत से चाहा है कि उस जीवन का अंत हो ही जाए जिस के साथ मेरी अनगिनत खुशगवार यादें जुड़ी रही हैं। कई बार मृत्यु मुक्ति का पर्याय बन जाती है और इस बार भी यही होने जा रहा था। 17 नवंबर की सुबह जब आलोक की फोन पर आवाज सुनाई दी कि आपके चालीस साल पुराने दोस्त चले गए तो मुझे यही अहसास हुआ। यह यात्री जी या हिं....

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