किंशुक गुप्ता का कहानी संग्रह ‘ये दिल है कि चोर दरवाजा’ में अधिकांश निषिद्ध और अस्वाभाविक कहे जाने वाले, प्रेम की कहानियां हैं। अस्वाभाविक इस अर्थ में कि इसमें स्त्री पुरुष के प्रेम से इतर समलैंगिक प्रेम है। जिस समाज में स्त्री पुरुष का स्वाभाविक प्रेम भी आग का दरिया है और उसमें डूबकर ही उसे पार करना होता है यानी असीम यातना सहते हुए ही प्रेम को पाया जा सकता है, तो ....
