दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस यानी कृत्रिम बौद्धिकता की चर्चा हो रही है। लोग चैट जीपीटी, एलेक्सा, एआर, वीआर कर रहे हैं, मगर दुर्भाग्य की बात है कि कोई भी, यहां तक कि भारत सरकार भी ये नहीं बता रही है कि विश्वगुरु के पास तो ये बहुत पहले से है। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या। भारतीय मीडिया को देख लो, वहां कृत्रिम बौद्धिकता अस्तबल में घोड़ों की लीद की तरह बिखरी पड़ी है।
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