कम्युनिटी साइट पर जो चीजें जिन रूपों में उपलब्ध हैं, उनका अपना महत्व है, मगर विशुद्ध साहित्यिक संदर्भ में देखें तो वहां बेहतरी के लिए अभी काफी गुंजाइश है। वैसे भी, किसी माध्यम के समुचित रचनात्मक इस्तेमाल के लिए संभावना हमेशा शेष रहती है। सोशल मीडिया के ये उपक्रम अपने आप में कोई अंतिम परिणति नहीं हैं। देखा जाए तो इनका समेकित लक्ष्य साहित्य के प्रति हमें उकसाना भर है। ये ....
