बांस की छाती पर
सूई से टांके जाते हैं शब्द
पुरस्कार पाता है लेखक-कवि
अमर होती है कविता-कहानी
बांस का बलिदान
किताबों की खोह में डूब जाता है।
कटे बांस की फुनगी
झुरा जाती है जेठ ....
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हिन्दी साहित्य की पत्रिकाओं की भीड़ में अलग पहचान बनाने वाली 'पाखी' का प्रकाशन सितंबर, 2008 से नियमित जारी है।