कोई छुईमुई का फूल नहीं है
और न ही
दिखाई पड़ने वाली
कोई चीज
कि छूते ही
खत्म हो जाएगा
प्रेम
ढाई अक्षर का तो है
लेकिन इसमें
ब्रह्मांड का कण-कण
समाहित है
प्रेम
इसका गान करते-करते
असंख्य कवि - कथाकार
काल के गाल में
समाहित होते चले गए
पर इसकी विराटता
अवर्णनीय है
प्रेम
कुछ अंदर....
