रचना: आप प्रेम में हैं, इसे कैसे पहचान पाते हैं?
प्रियंवद: इधर का तो मुझे नहीं पता, बहुत साल हो गए प्रेम किये हुए। पुराने प्रेम में ही हूं, तो थोड़ा भूल गया हूं कि कैसा लगता होगा। लेकिन प्रेम में होना, मतलब और कुछ न रह जाना। प्रेम के अलावा और किसी चीज में हम इस तरह नहीं हो सकते हैं। हम शारीरिक आकर्षण में नहीं हो सकते, हम मित्रता में नहीं हो सकते, हम मोह ....
