मेरे समक्ष स्त्री – प्रश्नों पर केन्द्रित तीन उपन्यास हैं और तीनों की थीम प्रेम, देह सामाजिक यथार्थ का जटिल विमर्श है| यह अलग बात है कि प्रेम के प्रति तीनों उपन्यासकारों का दृष्टिकोण एक जैसा नहीं है और यह अस्वाभाविक भी नहीं है| मानव ह्रदय का सबसे मार्मिक, मगर सबसे जटिल भाव प्रेम ही है जिसकी कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं दी जा सकी है, विचार करने का प्रयास जरूर सदियों ....
