शैलेंद्र शरण

मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, पीड़ा और पुनर्जीवन की  आकांक्षा का दस्तावेज

पंकज सुबीर का कविता संग्रह ‘उम्मीद की तरह लौटना तुम’ एक ऐसे समय में आया है, जब साहित्य और विशेषकर कविता से समाज की अपेक्षाएं लगातार बढ़ी हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति, तकनीकी शोर और राजनीतिक-सामाजिक जटिलताओं के बीच कविता अपने लिए न केवल एक स्थान तलाश रही है, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपी संवेदनाओं को जगाने का कार्य भी कर रही है। पंकज सुबीर का यह संग्रह इन्हीं मानव....

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