ऋचा भारद्वाज

ऋचा भारद्वाज की कविताएं

एक

शिव की जटाओं में गंगा 
शिवत्व प्राप्त कर चुकी है
धरती पर अवतरित होकर 
गंगा सांसारिक है
कर्मकांडों के लिए प्रस्तुत है।
इस गंगा की लहरों में स्थिरता नहीं, 
आवेग है।
ठहरा हुआ जल
शिवत्व की ओर ले जा सकता है।

दो

हे राम,
आपने अपनी अर्धांगिनी को विवश कर दिया 
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