नीरज नीर

नीरज नीर की कविताएं

लौटना पानी में

लौट आता हूं बार-बार
जल स्रोतों के पास
जहां गड़ी है मेरी जड़नाल
पानी, पानी से मिलना चाहता हैं
लहरों पर तैरती आती है
पानी की आत्मा
चूमने मेरी आत्मा का माथा
पूर्ण हो जाता हूं पानी के पानी होने से

कहते हैं देह बनी है पंचतत्वों से
मुझमें जल की मात्र अधिक है शायद
इसीलिए लौट आता हूं, बार-बार
जल स्रोतो....

Subscribe Now

पाखी वीडियो


दि संडे पोस्ट

पूछताछ करें