बात इतनी पुरानी है कि वे शब्द, जो उसे बयान कर सकते, अब हर भाषा के शब्दकोष से खो चुके हैं। बात इतनी नई है कि उसे बताने के लिए जो अभिव्यक्ति चाहिए वह अभी किसी भी भाषा में ईजाद ही नहीं हुई है। इसलिए मजबूरी में अब मुझे उपलब्ध शब्दों से ही काम चलाना पड़ रहा है।
वह जैसे दूध के ऊपर जमी हुई मलाई थी। वह जैसे मुंह में घुल गई मिठास थी। वह जैसे सितारों को थामने वाली आकाश-गंगा थी....
