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तसल्लियों के इतने साल बाद अपने हाल पर
निगाह डाल सोच और सोच कर सवाल कर
किधर गए वो वायदे सुखों के ख़्वाब क्या हुए
तुझे था जिनका इंतज़ार
वो जवाब क्या हुए
तू इनकी झूठी बात पर
ना और ऐतबार कर
के तुझको सांस-सांस का सही हिसाब चाहिए
घिरे हैं हम सवाल से हमें जवाब चाहिए
नप़फ़स-नप़फ़स क़दम-क़दम बस एक पि़फ़क्र दम-ब-दम
घिरे हैं हम सवाल से, हमें जवाब चाहिए
