संपादक

गगन है, मुक्त पवन है

‘पाखी संवाद-जहां शब्द डरते नहीं’ यूट्यूब मंच से 4 अप्रैल, 2026 
को प्रसारित संवाद।

मुक्त गनन है, मुक्त पवन है, मुक्त सांस गरबीली,
लांघ सात लंबी सदियों को हुई  शृंखला ढीली।

टूटी नहीं कि लगा अभी तक उपनिवेश का दाग
बोल तिरंगे तुझे उड़ाऊं या कि जगाऊं आग?

उठ रणराते, ओ बलखà¤....

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