उर्मिला शिरीष ने उस दौर में कहानियां लिखना प्रारंभ किया था, जब स्त्री विमर्श का तूफान हिंदी साहित्य तक नहीं पहुंचा था। सन् 83 में उनका पहला कहानी संग्रह ‘वे कौन थे’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ। नब्बे तक आते-आते उनके और दो कहानी संग्रह क्रमशः ‘मुआवजा’ (1985) और ‘केंचुल’ (1990) प्रकाशित हो चुके थे। कहानी का जो सिलसिला सन् 80 के आस-पास शुरू हुआ था, वह कभी थमा नहीं।
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