हिंदी कथा-साहित्य में संजीव समकालीन यथार्थवादी परंपरा के उन अग्रणी कथाकारों में हैं जिन्होंने भारतीय समाज की जमीनी संरचनाओं-विशेषतः ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रें को उनके मूल रूप में पकड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। संजीव के उपन्यास न केवल सामाजिक यथार्थ का अग्रलेख प्रस्तुत करते हैं, बल्कि वे उस यथार्थ के भीतर मौजूद छिपी शक्तियों, अंतर्विरोधों, संघर्षों और न....
