शंकरानंद

शंकरानंद की कविताएं

फिर से 

एक बार टूट गई तान 
फिर से लौटना चाहती है 
अपनी जगह पर
बस उसे एक मौका चाहिए

उसी तरह जैसे 
झाड़न्न् से धूल झाड़ने के बाद 
शुरू होता है एक नया दिन 
डिबिया जलाने के बाद अब भी 
गांव में कहीं दूर शुरू होती है 
काली घनी अंधेरी रात

रात में तारे आते हैं आसमान में 
चंद्रमा आता है 
अ....

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