शैलेय

शैलेय की कविताएं

वक्त

 कोई जरूरी नहीं है कि 
जैसा आप इस आईने में दिखाई दे रहे हैं
आपका चेहरा ठीक-ठाक वैसा ही हो
क्योंकि
सबको उनका चेहरा दिखा रहा आईना
खुद अपना चेहरा कहां देख पाता है
और अगर कहीं 
आईने में ही कोई खोट हुआ तो 
अच्छा-भला चेहरा भी
उसमें 
टेड़ा-मेढ़ा ही दिखाई देगा।

(2)

हर अंधड़ में 
ज....

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