अस्पताल के आपातकालीन विभाग के बाहर सभी काफी घबराए हुए थे। ताऊ जी इस छोर से उस छोर तक टहलकर अपनी बेचैनी दूर करने की कोशिश कर रहे थे। ताईजी के होंठ किसी बुरे की आशंका से लगातार कांप रहे थे, धीमे-धीमे स्वरों मे वह ईश्वर से प्रार्थना भी किए जा रही थी। मां के आंसू पलको पर ही ठहर गए थे। दिमाग सुन्न हो गया था। कुछ भी कहने-सुनने की स्थिति में नहीं थी वह। उसकी स्थिति उस जुआरी की तरह थी ....
