खुर्शीद आलम

जरा हौर उप्पर

मूल: वाजिदा तबस्सुम, उर्दू से हिंदी अनुवाद: खुर्शीद आलम

नवाब साहब नौकरखाने से झूमते-झामते निकले तो असली चमेली के तेल की खुशबू से उनका सारा बदन महका जा रहा था।
अपने शानदार कमरे की बेपनाह शानदार मसहरी पर आकर वो धप्प से गिरे तो सारा कमरा सुगंधित हो गया--- पाशा दुल्हन ने नाक उठाकर फिजा में कुछ सूंघते ही खतरा महसूस किया। अगले ही लम्हे वो नवाब साहब क....

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